Jo baatein teri nazmo me hai

जो बात तेरी नज़्मों में है , मेरी ग़ज़ल में नही ,जो खूशबू तेरी ज़ुल्फों में है ,
 कोई संदल में नही।तेरे होठों के मुक़ाबिल , कोई भी गुलाब नही ,
तेरी आँखों के मुक़ाबिल , कोई भी शराब नही।
जो बात तेरी ख़ामोशी मेँ , कोई हलचल में नहीँ।
एहसासों में तेरे तो , जज़्बात का समंदर है ||

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