बुझते हुए अरमानों का इतना ही फ़साना है , इश्क़ में तेरे हर पल हम को रहना है , चाहे सितमगर कितने भी ज़ख़्म दे हमें , इश्क़ में हर ज़ख्म हमें हँसते हुए सहना है . Shayari Jagat
नशे में भी तेरा ही नाम लबों पर आता है , चलते हुए मेरे पाँव लड़खड़ाते हैं , एक टीस सी उठती है दिल में मेरे , जब भी तेरा दिया हुआ दर्द याद आता है . Shayari Jagat
खामोश चेहरेपर हजारों पहरे होते है हंसती आखों में भी जख्म गहरे होते है... जिनसे अक्सर रुठ जाते है हम असल में उनसे ही रिश्ते गहरे होते है... Shayari Jagat